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Nuh: हरियाणा मे अभी तय नहीं कोन सरपंच कोन मेम्बर ,,,चुनाव आयोग के निर्देश के बाद कई पंच-सरपंच का छिनेगा पद ! होगी एजुकेशन सर्टिफिकेट की जांच

 
सरपंच पद

बताया जा रहा है कि आशंका जताई गई कि पंच और सरपंच के चुनाव जीते कई नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज ईकठा कर चुनाव लड़ा और उन्होंने जीत दर्ज कर ली। शिकायत मिलने पर जांच की कार्रवाई जल्द शुरू होने वाली है।

नूंह/मेवात/फिरोजुपर झिरका [अख्तर अलवी]। हाल ही में ग्राम पंचायतों में पंच तथा सरपंच पद के लिए निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों की शैक्षणिक योग्यता पर संदेह को लेकर राज्य चुनाव आयोग ने जिला उपायुक्तों को निर्देश देकर उनकी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच करने को कहा है।

आयोग द्वारा दिए गए जांच के आदेश के बाद नूंह जिले में हडकंप की स्थिति बन गई है। कई लोगों का मानना है यदि जिले की सभी पंचायतों में निर्वाचित हुए सदस्यों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच और पड़ताल हुई तो निश्चित ही इनमें कई लोग ऐसे मिल सकते हैं जिन्होंने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज लगाकर चुनाव लड़ा और जीत गए।

शिकायत मिलने पर कार्रवाई की उठी बात
बता दें कि राज्य चुनाव आयोग के पास उन जिलों से काफी शिकायतें प्राप्त हुई हैं जहां हाल ही में पंचायत चुनाव संपन्न हुए हैं। नूंह की भी 325 पंचायतों में पंच तथा सरपंच चुने गए हैं। आशंका है कि कुछ लोगों ने फर्जी कागजात के जरिये चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की है। 

जनप्रतिनिधियों को मिलेगा अपना पक्ष रखने का मौका
इस बाबत आई शिकायतों तथा संदेह के बाद चुनाव आयोग ने जिला उपायुक्तों को हरियाणा पंचायत एक्ट 1994 के सेक्शन 51 की उपधारा (3) के अंतर्गत कार्रवाई को कहा है। इस प्राविधान के अनुसार सरपंच तथा पंच को निलंबित करने के साथ ही पद से हटाया जा सकता है। हालांकि कार्रवाई से पहले जिला उपायुक्त संदेह के दायरे में आने वाले निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को सुनवाई का मौका देंगे।

फर्जी मिले कागजात तो नहीं दिलाई जाएगी शपथ
उधर, आयोग ने दस्तावेजों की जांच के आदेश तब दिए हैं जब हाल ही में निर्वाचित हुए पंच-सरपंचों ने अभी शपथ भी नहीं ली है। ऐसे में बताया जा रहा है कि जिन निर्वाचित पंच-सरपंच के दस्तावेज यदि जाली और फर्जी पाए गए तो उन्हें शपथ नहीं दिलाई जाएगी। यह शपथ केवल उन्हीं को दिलाई जाएगी जिनके शैक्षणिक दस्तावेज जांच में सही पाए जाएंगे।

2016 में भी हुआ था फर्जीवाड़े का खुलासा
वर्ष 2016 में हरियाणा में पहली बार पढ़ी लिखी पंचायतें चुनी गई थीं। दरअसल 2014 में सत्ता पर काबिज हुई मनोहर लाल की सरकार ने समुचित प्रदेश में पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू कर दी थी। इनमें पुरुष उम्मीदवारों के लिए 10वीं पास, किसी भी श्रेणी की महिला के लिए 8वीं पास और पंच पद के लिए अनुसूचित जाति की महिला उम्मीदवार के लिए 5वीं पास होना अनिवार्य किया गया था। उस समय सरकार द्वारा अचानक लिए गए इस निर्णय के बाद कई उम्मीदवार ऐसे थे, जिन्होंने रातों रात फर्जी दस्तावेज लगाकर चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर ली।

वहीं बाद में इनकी जांच हुई तो इसमें कई पंच तथा सरपंच लपेटे में आ गए, जिन्हें निर्वाचित होने के बाद अपना पद गवाना पड़ा। इस बार भी इस संदर्भ में संदेह जताया गया है कि कुछ लोगों ने जाली प्रमाण पत्रों के सहारे चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर ली। अब देखना होगा कि फर्जीवाड़े के इस झमेले में किन-किन पंचायतों के निर्वाचित पंच-सरपंच इसके लपेटे में आते हैं।