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UK-India Week 2018: पीयूष गोयल एफडीआई में निजी पूंजीगत अवसर की संभावनाओं पर करेंगे बात | Piyush Goyal on FDI into India Private capital opportunities

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लंदन। लंदन में आयोजित किए जा रहे 5वें वार्षिक यूके-इंडिया लीडरशिप कॉन्क्लेव में रेलवे और कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए केकेआर के सीईओ संजय नायर के साथ बातचीत की। इस बातचीत में एफडीआई में निजी पूंजीगत अवसर, दीर्घकालिक आधारभूत संरचना की आवश्यकताओं के लिए स्थानीय पूंजीगत पूल बनाना, निवेश में लंबी अवधि की बचत को स्थानांतरित करने जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई।

 Piyush Goyal

इसी सेशन में बातचीत करते हुए भारती इंटरप्राजेज के वाइस चेयरमैन राकेश भारती मित्तल ने कहा कि, भारतीय एफडीआई दुनिया में सबसे ज्यादा उदारीकृत नीतियों में से एक है। भारत सरकार निवेशकों को आमंत्रित कर रही है जबकि कई सरकारें सुरक्षावाद की बात कर रही हैं। भारत में राज्य सरकारें जरुरत से परे जाकर निवेशकों के लिए काम कर रही हैं।

राकेश

मित्तल ने कहा कि, ऐसे कई सकारात्मक पहलू हैं जो किसी विदेशी निवेशकों को भारत में आने और निवेश करने के लिए आकर्षित करेंगे। वहीं निजी क्षेत्र को भारत की प्राथमिक कृषि में निवेश करने की जरूरत है। प्रधान मंत्री मोदी जो कि किसान की आय को दोगुना करना चाहते हैं, उन्हें निजी क्षेत्र में निवेश करने की जरूरत है।

नायर

वहीं कॉन्क्लेव में केकेआर के सीईओ संजय नायर ने कहा कि, भारत सरकार ने सब्सिडी ना देने का अच्छा काम किया है। उन्हें बैंक निजीकरण पर काम करने की जरूरत है। नायर ने कहा कि, जब लोगों के दिमाग में मुद्रास्फीति की अपेक्षा होती है तब वे लोग रियल स्टेट और आभूषणों पर खर्च करते हैं। जब मुद्रास्फीति अधिक होती है तो वह रुपए की स्थिति पर असर डालती है। ऐसे में निर्यात को एक बड़ी भूमिका निभानी है। हर क्षेत्र अविकसित है, हमारे पास जाने का लंबा रास्ता है।

सेशन में शामिल एक अन्य पैनलिस्ट श्रुति सिंह ( उप सचिव, औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग, भारत सरकार) ने कहा कि, 2025 में भारतीयों की औसत आयु 29 वर्ष होगी। यह नया भारत है। भारत की अर्थव्यवस्था 7.4 फीसदी बढ़ेगी। हम तीसरी सबसे बड़ी व्यापार अर्थव्यवस्था होंगे। प्रधान मंत्री मोदी चाहते हैं कि युवा भारतीय नौकरी बनाने वाले हों, ना की मांगने वाला। मेक इन इंडिया के तहत भारत रक्षा, एयरोस्पेस, दवा क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है। मेक इन इंडिया के तीसरे स्तंभ में इन्फ्रा चेंज शामिल हैं। स्मार्ट शहरों में इन्फ्रा विकास और हरित ऊर्जा पर जोर दिया गया है। दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर में 100 अरब डॉलर के निवेश की संभावना जताई जा रही है।



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