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मराठा आरक्षण: सीएम देवेंद्र फडणवीस बोले- रिजर्वेशन में जरा देर लगेगी, मरहम लगाने की भी कोशिश करते दिखे | #MarathaQuotaStir: Reservation can be given only on recommendation of backward commission, says Devendra Fadnavis

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मुंबई। महाराष्‍ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण आंदोलन पर चर्चा के लिए शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। मीटिंग के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि मराठा आरक्षण पर सभी दलों स्‍टैंड एक जैसा ही है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने मराठा आरक्षण के लिए कानून बनाया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। यह स्थिति थोड़ी अलग है। आरक्षण केवल पिछड़ा आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही दिया जा सकता है। दुर्भाग्‍य से पहले कमीशन के चेयरमैन का निधन हो गया। अब हमने नया चेयरमैन निुयक्‍त किया है, लेकिन इसमें समय लगेगा।

मराठा आरक्षण: सीएम देवेंद्र फडणवीस बोले- रिजर्वेशन में जरा देर लगेगी, मरहम लगाने की भी कोशिश करते दिखे

मराठा आरक्षण आंदोलनकारियों पर नरम रुख अपनाते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘मैंने डीजीपी को निर्देश दिया है कि आंदोलनकारियों के खिलाफ जो भी केस दर्ज किए गए हैं, उन्‍हें वापस लिया जाए। सिर्फ वही केस बने रहने दिए जाएं, जो गंभीर किस्‍म के अपराध की श्रेणी में आते हैं। जैसे- पुलिसकर्मियों पर हमला करना, आगजनी आदि। देवेंद्र फडणवीस ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हालात शांतिपूर्ण होने चाहिए और किसी को भी खतरनाक कदम नहीं उठाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि बैकवर्ड कमीशन की रिपोर्ट आने के बाद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। 25 जुलाई को मराठा आंदोलनकारियों ने मुंबई, अहमद नगर, नवी मुंबई और ठाणे समेत कई इलाकों में बंद बुलाया। इस दौरान कई जगहों पर हिंसक घटनाएं भी हुईं। प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। इस आंदोलन की अगुवाई मराठा क्रांति मोर्चा कर रहा है।

मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच कांग्रेस के भारत भाल्के और भाऊसाहब चिकटगांवकर और रमेश कदम (आईएनसी) ने शुक्रवार को इस्तीफा देने तक की पेशकश कर डाली थी। इनकी इस्‍तीफे की पेशकश के बाद महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने विपक्षी दलों के विधायकों से अपील करते हुए कहा कि वे इस्तीफा देने की जगह मराठा आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ें। मराठा समुदाय काफी वक्त से सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण की मांग कर रहा है। कांग्रेस के शासनकाल में मराठा आरक्षण को लेकर बिल पास भी किया गया था, लेकिन हाईकोर्ट में जाकर मामला लटक गया। इसके बाद मराठा आरक्षण की मांग भी सुस्‍त पड़ गई और सरकार के स्‍तर पर भी चर्चा बंद हो गई। अब फडणवीस सरकार के सामने अचानक से मराठा आरक्षण का जिन्‍न बाहर आ गया है।

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