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कोलकाता की टीचर ने सुनाई आपबीती- इंटरव्‍यू में पूछा- क्‍या आपके ब्रेस्‍ट रियल हैं? | Was asked if my breasts are real: Kolkata teacher recalls horror at school interviews

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 इंटरव्यू में पूछा ब्रेस्ट को लेकर सवाल

इंटरव्यू में पूछा ब्रेस्ट को लेकर सवाल

सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (सेक्स चेंज) कराने के बाद अपने लिए दूसरी नौकरी की तलाश कर रही सुत्रिता डे से इंटरव्यू के दौरान भद्दे सवाल किए जाने लगे। उनकी क्वालीफिकेशंस के बारे में पूछने के बजाए उनसे उनके ब्रेस्ट के बारे में सवाल किया जाता। उनसे पूछा जाता कि क्या आपके स्तन असली है? इन भद्दे सवालों को झेलने वाली सुचित्रा के पास डबल एम.ए (जियोग्राफी और इंग्लिश) और बी.एड की डिग्री है। उनके पास टीचिंग का 10 साल का अनुभव हैं, लेकिन इन सब पर आधारित सवालों के बजाए उनसे उनके प्राइवेट पार्ट्स के बारे में सवाल किया गया।

इंटरव्यू में पूछा-क्या बच्चे पैदा कर सकती हैं?

इंटरव्यू में पूछा-क्या बच्चे पैदा कर सकती हैं?

दरअसल सुचित्रा ने साल 2017 में जेंडर चेंज की सर्जरी करवाई थी। जेंडर सेंज करवाकर वो हिरण्यमय डे से सुचित्रा डे बन गई। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सुचित्रा ने बताया कि मेरी डिग्रियां और मेरे काम के अनुभव के बजाए वो लोग सिर्फ ये देखते थे कि एक पुरुष अब महिला के रूप में ट्रांसफॉर्म हो चुका है। वो मुझसे भद्दे भद्दे सवाल पूछते थे। मुझसे पूछा जाता था कि क्या मैं बच्चे पैदा कर सकती हूं। उनसे पुरुषों के परिधान पहनने के लिए कहा गया।

 थर्ड जेंडर के लिए लोगों की सोच

थर्ड जेंडर के लिए लोगों की सोच

सुचित्रा ने एमआरएस सर्जरी करवाने के बाद वो ठाकुरपुर के उसी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया था, जहां वो सर्जरी से पहले पढ़ाती थी। लेकिन उसने नौकरी बदलने की सोची इसलिए शहर के बड़े-बड़े स्कूलों में इंटरव्यू देना शुरू किया, लेकिन उनके लिए ये अनुभव बेहद डरावना था। मर्द से औरत बनने के बाद उनके लिए लोगों की नजरिया तिरास्कारपूर्ण है। इंटरव्यू के दौरान सुचित्रा ने बताया कि थर्ड जेंडर के लिए लोगों की सोच हास्यास्दपद है। उन्होंने कहा कि चूंकि मेरे सभी सार्टिफिकेट में मेरा लिंग पुरुष था इसलिए एक इंटरव्यू के दौरान मुझे मर्दों के परिधान पहनने के लिए कहा गया।

 मानवाधिकार आयोग से की शिकायत

मानवाधिकार आयोग से की शिकायत

सुचित्रा ने इस अपमान और तिरस्कार के बाद मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है। 11 जून को उन्होंने पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत की है और बताया है कि कैसे ट्रांसजेंडर के साथ लोग पेश आते हैं। उन्होंने कहा कि मैं इस अपमान को और बर्दाश्त नहीं कर पाई और इसलिए मैंने कोलकाता के नामी स्कूलों द्वारा पूछे गए भद्दे सवालों से तंग आकर आयोग से शिकायत की। सुचित्रा ने कहा कि मेरे जैसे पढ़े-लिखे और अनुभवी को अगर इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा तो उन लोगों का क्या होता होगा जो शिक्षत नहीं है।

 देश की सर्वोच्च अदालत ने दी मान्यता

देश की सर्वोच्च अदालत ने दी मान्यता

गौरतलब है कि साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर्स को दर्जा देते हुए उनके लिए ‘थर्ड जेंडर’ कैटगरी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस में दाखिला दिया जाएगा। वो अपनी योग्यता के साथ नौकरी भी कर सकते हैं। हालांकि कोर्ट के फैसले के बावजूद समाज में ट्रांसजेंडर्स को देखने का नजरिया नहीं बदला है।



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